| 1 | छायावाद और कामायनी | Dr. Renu Bala | सम्मेलन पत्रिका | 2023 |
| 2 | नयी कविता में विम्ब और सपाटबयानी अक्षरा | Dr. Renu Bala | अक्षरा | 2023 |
| 3 | प्रगतिवादी काव्य में विम्ब योजना | Dr. Renu Bala | अक्षरा | 2023 |
| 4 | Achchha Manushya Dharti ke Vriksha Par Laga Sundar Pushpa Hota Hai | Dr. Shridharam | बया | 2022 |
| 5 | Bhartiya Sanskriti Evam Sahitya me Naari | Dr. Rubi Devi | Janakriti | 2022 |
| 6 | Dadu Panth ke shikhar Sant | Dr.Vijaya Nrayan Mani | Hindi Anusheelan | 2022 |
| 7 | अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार कथाकार गीतांजलि श्री को | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 8 | असगर वजाहत को नाटक महाबली के लिए व्यास सम्मान | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 9 | कवि ज्ञानेन्द्रपति को नागार्जुन पुरस्कार | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 10 | चंपारण जिले के स्थानीय कृषि आधारित उद्योगों पर वैश्वीकरण का प्रभाव | Prof. Gyantosh Kumar Jha | गगनांचल | 2022 |
| 11 | नई आर्थिक नीतियों ने अमीर और गरीब के बीच खाई चौड़ी की है | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 12 | नवजागरण, स्त्री चेतना और टैगोर के नाटक | Prof. Gyantosh Kumar Jha | आधुनिक साहित्य | 2022 |
| 13 | नाटक और रंगमंच को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की ज़रूरत | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 14 | भारतीय साहित्य मानव जाति की प्राचीन ज्ञान परम्परा का दर्पण है | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 15 | महामारी और रचनात्मकता | Prof. Gyantosh Kumar Jha | बया | 2022 |
| 16 | महुए के बन में कंडे सा मैं सुलगना चाहता हूँ | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 17 | रचनाकार श्रष्टा थे विष्णुचंद शर्मा | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 18 | राजकमल चौधरी और विजेंद्र में समानताएं | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 19 | विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता | Dr. Shridharam | कथादेश | 2022 |
| 20 | कथादेश में प्रकाशित कविता के लिए अनामिका अनु ...... | Dr. Shridharam | कथादेश | 2021 |
| 21 | कामायनी आलोचकों की दृष्टि में | Renu Bala | बनास जन | 2021 |
| 22 | कोरोना के परिप्रेक्ष्य में विश्व हताहत | Dr. Ram Ratan Prasad | वाद संवाद | 2021 |
| 23 | कोरोना: लाकडौनमेंजीवन | Anil Kumar Singh | Vaad - Samvaad | 2021 |
| 24 | जीवन की विभिन्न गतिविधियों में स्त्री की पड़ताल | Renu Bala | बनास जन | 2021 |
| 25 | दिव्या विजय को कृष्ण प्रताप कथा सम्मान | Dr. Shridharam | कथादेश | 2021 |
| 26 | दुनियां की दीवारों में रचनाकार क्जिदाकी के समान | Dr. Shridharam | कथादेश | 2021 |
| 27 | ब्रिटेन में अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव | Dr. Shridharam | कथादेश | 2021 |
| 28 | रेणुकीकहानियां : ग्राम्यजीवनकायथार्थ | Anil Kumar Singh | Nagafani | 2021 |
| 29 | साहित्य अकादमी द्वारा रेणु जन्मशती का आयोजन | Dr. Shridharam | कथादेश | 2021 |
| 30 | अशोक वाजपेयी का रचनापाठ | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 31 | कबीर वाणी में देशहित | Dr. Ram Ratan Prasad | वाद संवाद | 2020 |
| 32 | कवि विरेन डंगवाल स्मारक का लोकार्पण | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 33 | किचन से शिखर तक | Prof. Jaspali Chauhan | केशव संवाद | 2020 |
| 34 | केरल में सामाजिक आंदोलन और दलित साहित्य | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 35 | गाँधी युगीन हिंदी पत्रकारिता | Prof. Jaspali Chauhan | संवाद पथ | 2020 |
| 36 | ग्रामीण आदिवासी महिलाऐं और राष्ट्रीय अवधारणा | Dr. Ram Ratan Prasad | वाद संवाद | 2020 |
| 37 | नई शिक्षानीति: विचारणीय बिंदु | Prof. Jaspali Chauhan | साहित्य यात्रा | 2020 |
| 38 | नागार्जुन के उपन्यास पर राष्ट्रीय संगोष्ठी | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 39 | नागार्जुन स्वाधीन भारत के सबसे बड़े राजनितिक कवि हैं | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 40 | नेमिचंद्र जैन शताब्दी | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 41 | प्रतियोगी परीक्षाओं में आमूलचूल परिवर्तन | Prof. Jaspali Chauhan | राष्ट्र किंकर | 2020 |
| 42 | प्रतिरोध की आवाज बुलंद करता प्रलेश | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 43 | हमारा हर शब्द हमारी पक्षधरता को बतलाता है | Dr. Shridharam | कथादेश | 2020 |
| 44 | आलोचना व्यक्तिगत पसंद-नापसंद की चीज नहीं है | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 45 | खड़ीबोली का अविर्भाव एवं विकास | Prof. Jaspali Chauhan | जनकृति | 2019 |
| 46 | जगदलपुर में शब्दों से परे पर विचार विमर्श | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 47 | जवाब मांगना गाँधी ने सिखाया | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 48 | जीवन संग्राम के योद्धा : विकलांग पात्रों की प्रसिद्ध कहानिया | Dr. Shridharam | विकलांगता समीक्षा | 2019 |
| 49 | नागार्जुन हिंदी कविता के प्रेमचंद हैं | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 50 | प्रवासी श्रमिक | Prof. Jaspali Chauhan | अक्षर वार्ता | 2019 |
| 51 | भारत दुर्दशा और नवजागरण | Prof. Jaspali Chauhan | अनुगुंजन | 2019 |
| 52 | भारतीय देशज साहित्य : प्रेमाख्यान | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 53 | भारतेन्दु युगीन खड़ीबोली | Prof. Jaspali Chauhan | साहित्य यात्रा | 2019 |
| 54 | महादेवीवर्मा और आलोचनाकामर्दवादीजाल | Dr. Shridharam | समालोचन | 2019 |
| 55 | महापंडित राहुल संकृत्यायन की एक सौ पच्चीसवीं जयंती | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 56 | रंगभूमि का सूरदास: अपने अधिकारों के लिए सजग नायक | Prof. Gyantosh Kumar Jha | विकलांगता समीक्षा | 2019 |
| 57 | रंगशीर्ष जयदेव नाट्योत्सव | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 58 | राजभक्ति और भारतेंदु | Prof. Jaspali Chauhan | साहित्य यात्रा | 2019 |
| 59 | लोकतंत्र बढ़ने के स्थान पर घटा है -असगर वजाहत | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 60 | सरयू से गंगा पर परिचर्चा | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 61 | साहित्यिक पत्रिका : संकट से संभावनाओं की ओर | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 62 | सृजन संवाद में कहानीकार कमलेश | Dr. Shridharam | कथादेश | 2019 |
| 63 | हिंदी का उद्भव और विकास | Prof. Jaspali Chauhan | शब्द विधान | 2019 |
| 64 | Mahadevi Varma ka jeevan darshan | Dr. Shridharam | EPG Pathashala (NME-ICT) | 2018 |
| 65 | अपने साक्षात्कारों में नागार्जुन | Dr. Shridharam | समालोचन | 2018 |
| 66 | आदिवासी समाज ग्लोबल दृष्टिकोण | Dr. Ram Ratan Prasad | वाद संवाद | 2018 |
| 67 | उर्दू: भाषा बनाम शैली | Prof. Jaspali Chauhan | गवेषणा | 2018 |
| 68 | कबीर का धर्म | Prof. Jaspali Chauhan | वाद संवाद | 2018 |
| 69 | खरबार जनजाति महिलाओं का सामाजिक जीवन | Dr. Ram Ratan Prasad | वाद संवाद | 2018 |
| 70 | तुलसी का काव्य विवेक और मर्यदाबोध पर चर्चा | Dr. Shridharam | कथादेश | 2018 |
| 71 | दरभंगा में संगीत -परम्परा पर कार्यशाला का आयोजन | Dr. Shridharam | कथादेश | 2018 |
| 72 | दूधनाथ सिंह की स्मृति में लखनउ में शोक - सभा | Dr. Shridharam | कथादेश | 2018 |
| 73 | भक्ति भावना और भारतेंदु | Prof. Jaspali Chauhan | वाक् सुधा | 2018 |
| 74 | भाषाओँ में अशुद्धि-शोधन | Prof. Jaspali Chauhan | वाक् सुधा | 2018 |
| 75 | मुक्तिबोध और त्रिलोचन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी | Dr. Shridharam | कथादेश | 2018 |
| 76 | राष्ट्रीयता और दिनकर | Prof. Jaspali Chauhan | ग्लोबल थॉट | 2018 |
| 77 | रेणु के कथा साहित्य में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी | Dr. Ram Ratan Prasad | वाद संवाद | 2018 |
| 78 | लोकरंग 2018 का रंग | Dr. Shridharam | कथादेश | 2018 |
| 79 | वैदिक संवत्सर का वैज्ञानिक आधार | Prof. Jaspali Chauhan | वाक् सुधा | 2018 |
| 80 | समकालीनों में सबसे महत्वपूर्ण कवि हैं इब्बार रब्बी | Dr. Shridharam | कथादेश | 2018 |
| 81 | हिन्दी आलोचना के द्वारा महादेवी वर्मा का मूल्यांकन | Dr. Shridharam | सत्राची | 2018 |
| 82 | सनसनीखेज पत्रकारिता का नया रूप : पीतपत्रकारिता का विश्लेष्णात्मक अध्ययन | Sanjay Singh Baghel | समसामयिक सृजन | 2022 |
| 83 | अन्यभाषा के रूप में हिंदी-भाषा शिक्षण की व्यावहारिक समस्याएँ | Asha Pandey | शब्दब्रह्म International Research Journal of Indian Languages | 2021 |
| 84 | इंटरनेट विज्ञापनों में हिंदी-भाषा की संभावनाएँ | Asha Pandey | शोध, समीक्षाऔरमूल्यांकन Peer Reviewed & Refereed Research Journal | 2021 |
| 85 | तुलसी में लोक-संघर्ष | Asha Pandey | प्रिंटिंग एरिया आंतरराष्ट्रीय बहुभाषिक शोध पत्रिका | 2021 |
| 86 | तुलसीदास निरूपित :मानव धर्म की आचार-संहिता | Asha Pandey | International Journal of Hindi Research | 2021 |
| 87 | भारतीय लोकतंत्र के विकास में सोशल मीडिया की भूमिका | Sanjay Singh Baghel | गगनांचल(ICSSR) | 2021 |
| 88 | मुखौटा-कला और रंगकर्म | Prof. Gyantosh Kumar Jha | प्राग्ज्योतिका | 2021 |
| 89 | वाक्य संरचना का अनिवार्य पहलू : पदान्विति | Asha Pandey | शब्दब्रह्म International Research Journal of Indian Languages | 2021 |
| 90 | वात्सल्य के चितेरे : सूरदास | Asha Pandey | शोध, समीक्षाऔरमूल्यांकन Peer Reviewed & Refereed Research Journal | 2021 |
| 91 | विज्ञापन-भाषा में विचलन की भूमिका | Asha Pandey | संवादपथ पत्रिका | 2021 |
| 92 | व्यंग्यात्मक सूक्तियाँ | Asha Pandey | विद्यावार्ता peer reviewed International Refereed Research Journal | 2021 |
| 93 | व्यंग्यायुध : मुहावरे लोकोक्तियाँ | Asha Pandey | शोध-श्री peer reviewed International Refereed Research Journal | 2021 |
| 94 | शब्दब्रह्म की शक्तियाँ : शब्द शक्तियाँ | Asha Pandey | International Journal of Hindi Research | 2021 |
| 95 | स्वातंत्र्योत्तर मोहभंग का साहित्य | Asha Pandey | विद्यावार्ता peer reviewed International Refereed Research Journal | 2021 |
| 96 | हरिशंकर परसाई का व्यंग्य-सौष्ठव | Asha Pandey | शोध दिशा विश्वस्तरीय शोध पत्रिका | 2021 |
| 97 | हिंदी वाक्य संरचना का अनिवार्य पहलू : पदक्रम | Asha Pandey | शोध-ऋतु peer reviewed International Refereed Research Journal | 2021 |
| 98 | जन-भाषा के कवि: नागार्जुन | Asha Pandey | शोध, समीक्षाऔरमूल्यांकन Peer Reviewed & Refereed Research Journal | 2020 |
| 99 | प्रसंग और आलोचना | Arvind Kumar Mishra | समीक्षा | 2018 |